लक्ष्मी के साथ उल्लू और गणेश के साथ चूहा क्यों? क्या यह अन्न-भंडार की रक्षा की कथा है?
Why the owl with Lakshmi and the mouse with Ganesh? A story of guarding the harvest?
लक्ष्मी गणेश का आर्थिक समाजशास्त्र
Economical Sociology of Laxmi Ganesh
धान उत्पादिका लक्ष्मी और चूहा संहारक गणेश का ऐतिहासिक व वैज्ञानिक रहस्य
मौलिक शोधशोध ग्रन्थ
"लक्ष्मी गणेश का आर्थिक समाजशास्त्र" पुस्तक आध्यात्मिकता- धार्मिकता का समाजीकरण है। यह प्राचीन भारतीय सामाजिक घटनाओं को धार्मिक काल्पनिकता के आवरण से बाहर निकाल कर उसे यथार्थ समाज वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान करती है। यह वर्तमान एवं अतीत के समाज शास्त्र को जोड़ने वाली कड़ी है।
यह पुस्तक स्पष्ट करती है कि लक्ष्मी भारतीय समाज की एक आदर्श नारी और महान् कृषिका थीं। यह तीसरे कूर्मावतार (ब्रह्मा और शिव जैसे कूर्मावतार पहले हो चुके थे) विष्णु की पत्नी थीं। हजार गुनी पैदावार देने वाले धान की खोज इन्होंने ही की थी। आप का धान ही कालान्तर में धन का पर्याय बन गया। धन-धान्य की वृद्धि करने के कारण लक्ष्मी धन की देवी कही जाने लगी। फिर तो लक्ष्मी और धन पर्यायवाची हो गये।
लक्ष्मी एक ऐसी महान् कृषिका थीं, जिन्होंने न केवल धान की खेती का विस्तार किया वरन् खाद्यान्न तथा सामानों को नुकसान पहुंचाने वाले खेती के सबसे बड़े शत्रु चूहों के विनाश के लिए उनके सबसे बड़े संहारक उल्लू की खोज भी की। और उनके पालने पर जोर दिया। धन के रक्षक उल्लू को इसीलिए लक्ष्मी के वाहन के रूप में दिखाया जाता है और धान के पर्व दीवाली पर उल्लू के साथ लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
पुस्तक में अनेकों गणेशों की खोज एवं उनकी उपलब्धियों का भी चित्रण किया गया है। इसके अनुसार 'गणेश' कोई व्यक्ति न होकर उपाधि रही है, जिसे देवतागण के सबसे श्रेष्ठ देवता को प्रदान किया जाता था। देवता का अर्थ होता है देने वाला। इस प्रकार सबसे अधिक योगदान देने वाला गणेश कहा जाता रहा है। एकशृंग गणेश के साथ ही ब्रह्मा-मनु, शिव, इन्द्र, विष्णु, लक्ष्मी, चण्डी, बुद्ध, कृषक इत्यादि को भी इसी आधार पर गणेश कहा गया है।
The book reads the worship of Lakshmi and Ganesh as sociology and economics rather than religion. It argues that Lakshmi was a pioneering woman cultivator whose paddy (dhaan) became synonymous with wealth (dhan), that she promoted the owl for protecting crops from rats, and that 'Ganesh' is a title borne by many leading figures, the last of whom (later given an elephant head) was a rat-killer whose name 'Sunda' became 'Shunda'.
पुस्तक के अनुसार लक्ष्मी महान कृषिका थीं, कूर्मावतार विष्णु की पत्नी, जिन्होंने उच्च पैदावार वाले धान की खोज की।
पुस्तक का दावा है कि लक्ष्मी का ‘धान’ ही कालान्तर में ‘धन’ का पर्याय बन गया।
चूहा-विनाश में समान भूमिका के कारण दीवाली पर उल्लू वाली लक्ष्मी और गणेश की एक वेदी पर पूजा होती है।
पुस्तक के अनुसार ‘गणेश’ व्यक्ति नहीं, पदवी है; विनायक, देवराज, ज्येष्ठराज, गणपति इसके पर्याय हैं।
दक्षिण भारत में चूहे को ‘सुण्डा’ कहते हैं; पुस्तक के अनुसार ‘सुण्डा गणेश’ ही बाद में ‘शुण्ड गणेश’ बना।
पुस्तक के अनुसार वैदिक गणेश ‘एक शृंग’ (एक सींग का मुकुट) थे, ‘एकदन्त’ नहीं।
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गणेश: व्यक्ति नहीं, पदवी
अभी हमने देखा कि गणेश, गणपति, गणनायक, जनगण नायक, विनायक, गणाधीश, गणेश्वर, सर्वेश्वर, देवराज, ज्येष्ठराज, महादेव, देवाधिदेव इत्यादि शब्द पर्यायवाची हैं। देवों में या देवगणों में जो सबसे अधिक उपयोगी श्रेष्ठ अथवा सबसे बड़ा दाता होता है, वही गणेश अथवा विशिष्ट नायक विनायक कहलाने का अधिकारी होता है। वही सबका स्वामी/ईश्वर/राजा सम्राट विराट/महादेव हो सकता है। इसके लिए सबका क्षेमकर्ता होना आवश्यक है। देवत्व भी ऐसे ही महामानवों को प्रदान किया जाता रहा है।
डॉ. निर्मोही ने वेद आदि ऐसे ही प्राचीन ग्रन्थों, पुरातात्विक सामग्री इत्यादि का उपयोग कर भारतीय समाजशास्त्र के लिए 'ऐतिहासिक समाजशास्त्र' की आधार शिला रखी है। आपने भारतीय सामाजिक चिन्तन को धार्मिक आवरण से बाहर निकालकर उसे समाज शास्त्रीय स्वरूप प्रदान किया है।
कुछ भी हो डॉ. निर्मोही ने इस कृति के माध्यम से धर्म को समाज वैज्ञानिक द्रष्टि से समझने की नयी दृष्टि प्रदान की है। अन्य कृतियों की तरह आप की यह कृति भी समाज वैज्ञानिकों, अर्थशास्त्रियों, इतिहासकारों, धार्मिकों, तथा शोधकर्ताओं को भारतीय समाज एवं धर्म आदि को समझने में अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होगी। ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है। डॉ. निर्मोही इस प्रयास के लिए बधाई के पात्र हैं।
डॉ. निर्मोही की यह नवीन कृति "लक्ष्मी गणेश का आर्थिक समाजशास्त्र" धार्मिक देवता लक्ष्मी और गणेश को काल्पनिक धार्मिकता के आवरण से बाहर निकाल कर उन्हें यथार्थ सामाजिक स्वरूप प्रदान करती हुई दिखायी देती है। लेखक ने वेद रामायण, महाभारत, स्मृति, पुराण जातक कथाओं जैसे धार्मिक ग्रंथों, ऐतिहासिक तथा पुरातात्विक साक्ष्यों इत्यादि के आधार पर लक्ष्मी-गणेश से जुड़े जो नवीन निष्कर्ष दिये है उन्हें खण्डित करना असम्भव नहीं तो कठिन अवश्य है।
प्रश्न उठता है कि गणेश की प्रथम पूजा का क्या आधार है? उनकी पूजा कब से प्रारम्भ हई? उन्हें हस्ती मुखी क्यों बनाया जाता है? उनके साथ जुड़े प्रतीकों का क्या निहितार्थ है? उन्हें मैल या गोबर से क्यों बनाया जाता है? उनकी सवारी के रूप में चूहा दिखाने का क्या निहितार्थ है। क्या वास्तव में वे चूहे पर सवारी करते थे?
लक्ष्मी गणेश का आर्थिक समाजशास्त्र
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