क्या हम सब ‘काश्यपी’ कहलाते हैं — तो फिर कश्यप कौन थे?
If humankind is called ‘Kashyapi’ — who exactly was Kashyap?
महर्षि कश्यप
Maharshi Kashyap
मानव जाति के आदि पिता और ‘काश्यपी’ सृष्टि की खोज
मौलिक शोध14 अध्याय
महर्षि कश्यप एक वैदिक ऋषि थे। कहते हैं कि आपने पाँच लाख से अधिक वेद मंत्रों की रचना की थी। इसका उल्लेख अनेक प्राचीन ग्रन्थों में मिलता है, परन्तु वे मंत्र आज उपलब्ध नहीं हैं। आप एक प्रजावत्सल सम्राट भी थे। तभी तो उन्हें राजर्षि, प्रजापति कश्यप भी कहा जाता था। आप की पत्नी मनु थी, जिसकी सन्ताओं ने कृषकीकरण को वैश्विक रूप प्रदान कर सम्पूर्ण संसार को कृषि विद्या क्रषिक संस्कृति का वैश्वीकरण या भूमण्डलीकरण भी किया। इस प्रकार आप दोनों पति-पत्नी भूमण्डलीकरण के जनक थे।
सम्पूर्ण भूमंडल में महर्षि कश्यप की सन्तानों के फैल जाने के कारण ही आपको “सृष्टिकर्ता ब्रह्मा' की उपाधि दी गयी। ब्रह्म ब्रह्मा का अर्थ होता है जो फैले फैलकर विस्तार पा जाये, सम्पूर्ण संसार या मानव समाज हो जाये।
पुस्तक का उद्देश्य संसार के आदि पूर्वज महर्षि कश्यप के सच्चे स्वरूप को संसार के सामने लाना, उनके विरुद्ध फैलाये गये झूठ का पर्दाफाश करना तथा विश्व का एकीकरण रहा है।
The book presents Maharshi Kashyap, a Vedic sage and 'Rajarshi', as the common ancestor of humankind, with his wife Manu as the first mother, and argues that the title 'Brahma the creator' was given to him for the vast spread of his progeny. Across fourteen chapters it treats his role in composing the Vedas, his family, farming (Kurma) identity, the later transformation of his descendants into castes, and his place in early globalisation. The author states his aim as bringing out Kashyap's true historical and social form.
लेखक के अनुसार कश्यप ने पाँच लाख से अधिक वेद मंत्र रचे, जो आज उपलब्ध नहीं हैं।
दनु की सन्तानें दानव, दिति की दैत्य, अदिति की आदित्य और मनु की मनुष्य कहलायीं।
पुस्तक के अनुसार ब्रह्मा के चार मुख चारों वेद कण्ठस्थ होने के प्रतीक हैं।
महाशिवरात्रि को मनु-कश्यप विवाह का दिन और विश्व का पहला प्रेम दिवस बताया गया है।
कुर्मी जाति की चार हजार से अधिक उपजातियाँ कश्यप को अपना पूर्वज मानती हैं।
पुस्तक चौदह अध्यायों में विभक्त है।
14 अध्याय, एक यात्रा
01वेदों में ऋषि परम्परा और महर्षि कश्यपVedic sage tradition and Maharshi Kashyap
प्रथम अध्याय में महर्षि कश्यप को एक वैदिक ऋषि के साथ ही वेद रचना में उनके योगदान को रेखांकित किया गया है और बताया गया है कि वेद ईश्वरीय कृति (जैसा ब्राह्मण कहते रहे हैं) न होकर महर्षि कश्यप जैसे साहित्यकारों की रचना हैं।
- वेद मंत्रों के रचनाकार कूर्म कश्यप
- वेद कश्यप आदि ऋषियों की मानवीय कृति
- वेदों को ईश्वरीय कृति बताना अज्ञानता का द्योतक
- कहां गये महर्षि कश्यप के पांच लाख वेद मंत्र
02महर्षि कश्यप का जन्म, विवाह और उनका विराट परिवारBirth, marriage and vast family of Maharshi Kashyap
दूसरा अध्याय महर्षि कश्यप के जन्म, विवाह तथा उनके विराट परिवार का परिचय कराता है। इसी अध्याय में महाशिव रात्रि और विश्व के प्रथम प्रेम दिवस को माता मनु और पिता कश्यप के साथ संयुक्त कर प्रस्तुत किया गया है।
- कश्यप विवाह का दिन ही महाशिवरात्रि तथा विश्व का पहला प्रेम दिवस
- महर्षि कश्यप का जन्म, शिक्षा दीक्षा
- जब कश्यप महाराजाधिराज सम्राट बने
- प्राचीन महापुरुषों के जन्म दिन का निर्धारण और महर्षि कश्यप का जन्म दिन
- कश्यप का विवाह और उनका विराट परिवार
- कश्यप का विवाह और मैथुनी सृष्टि का प्रारंभ
- कश्यप और शंकर साढू भाई
- इन्द्र और विष्णु कश्यप के नाती
- कश्यप विश्व के प्रथम गोत्र प्रवर्तक
- सम्पूर्ण संसार कश्यप का विराट परिवार
- महर्षि कश्यप से प्राचीन दुनिया के मानवों की पहचान
- कश्यप के विवाह का दिन ही महाशिव रात्रि और और विश्व का पहला प्रेम दिवस
- महाशिवरात्रि (शिवलिंग पूजा) का सम्बन्ध मनु-कश्यप से या शंकर पार्वती से?
- शिव लिंग पूजा का सम्बन्ध मात्र मनु और कश्यप से
- संसार के पति-पत्नियों के लिए आदर्श पति-पत्नी मनु और कश्यप (ब्रह्मा)
03कूर्म और कूर्मावतार पालनकर्ता महर्षि कश्यपKurma and the Kurma-avatar: Kashyap the nurturer
तीसरे अध्याय में महर्षि सम्राट कश्यप के कृषक होने के साथ ही उनके कूर्मवतार अर्थात सर्वश्रेष्ठ कुर्मी किसान के रूप को प्रस्तुत किया गया है।
- कूर्म से तात्पर्य
- कूर्मावतार कश्यप
- कूर्मावतार कोई कुछआ नहीं वरन महान कूर्म कृषक
- पालनकर्ता कूर्मावतार कश्यप
04महर्षि कश्यप ही सृष्टिकर्ता ब्रह्माMaharshi Kashyap himself is Brahma the creator
चौथे अध्याय में सिद्ध किया गया है कि महर्षि कूर्म कश्यप को ही सृष्टिकर्ता ब्रह्मा कहा गया है। यह सृष्टिकर्ता ब्रह्मा मात्र मानवों का ही सृष्टिकर्ता है। सर्वाधिक वंश विस्तार करने के कारण आप को सृष्टिकर्ता तथा ब्रह्मा कहा गया है।
- सृष्टिकर्ता और महर्षि कश्यप
- हिन्दू धर्म में महर्षि कश्यप केवल मानवों के सृष्टि कर्ता हैं
- महर्षि कश्यप को ब्रह्मा क्यों कहा गया?
- सृष्टिकर्ता ब्रह्मा कश्यप को दी गयी उपाधि है
- महर्षि कश्यप ही ब्रह्मा
05वेदान्त का चराचर जगत का काल्पनिक सृष्टिकर्ता ब्रह्माThe imagined creator-Brahma of Vedanta
पांचवें अध्याय में ब्राह्मण धर्मी चराचर जगत के नकली सृष्टिकर्ता ब्रह्मा का चित्रण किया गया है।
- वेदान्त (ब्रह्माण धर्म) का सृष्टिकर्ता ब्रह्म ब्रह्मा कौन?
- ब्रह्मा का काल्पनीकीकरण और वेदान्त के ब्रह्म/ब्रह्मा का उदय
- वृहदारण्यकोपनिषद से काल्पनिक ब्रह्म का उदय
- दूसरा सृष्टिकर्ता मनु और उसकी पत्नी शतरूपा कहां से आ गयी?
06महर्षि कश्यप उर्फ ब्रह्मा ही ईस्लाम और ईसायत के बाबा आदम/एडमMaharshi Kashyap alias Brahma is Baba Adam/Adam of Islam and Christianity
छठवें अध्याय में दिखाया गया है कि सृष्टिकर्ता कश्यप ही ईस्लाम और ईसाई धर्म के आदम अथवा एडम हैं।
- कश्यप ही संसार के मानवों के आदि पिता आदम
07वेदों के ज्ञाता, व्याख्याता, रचनाकार महर्षि कश्यपMaharshi Kashyap: knower, expounder and composer of the Vedas
सातवें अध्याय में सम्राट कश्यप के वेदों के ज्ञाता, व्याख्याता, रचनाकार तथा आदर्श शिक्षक के स्वरूप को उकेरा गया है। उसमें कश्यप वंशीय रावण महाराज को भी याद किया गया है।
- महर्षि कश्यप वेदों के ज्ञाता
- ब्रह्मा के चार मुंह चार वेदों के प्रतीक
- चार वेद छः शास्त्रों के ज्ञाता कश्यप वंशीय महाराज रावण
- महर्षि कश्यप के कारण ही आज वेद उपलब्ध हैं
08महर्षि कश्यप और माता मनु ही मानवों के आदि माता-पिताMaharshi Kashyap and Mother Manu: first parents of humankind
आठवें अध्याय में संसार के समस्त मानवों, धर्मावलम्बियों, जातियों के आदि माता-पिता के रूप में कश्यप और उनकी पत्नी मनु को याद किया गया है।
- स्वायंभुव मनु और चौदह मनु
- स्वायंभुव मनु प्रथम और माँ थी
- माँ ही सन्तान को जन्म देती है पिता नहीं
- माताओं के नाम पर सन्मति के नामकरण की प्राचीन वैदिक परम्परा
- मनु के माँ होने के ऋग्वैदिक प्रमाण
- आदि मनु और कश्यप प्रथम स्त्री-पुरुष नहीं
09आदर्श शासक, शिक्षक राजर्षि कश्यपRajarshi Kashyap: ideal ruler and teacher
नौवें अध्याय में महर्षि कश्यप उदण्ड स्वभाव के अपने शिष्य परशुराम को नियंत्रित करते हुए दिखायी देते हैं और अपने इस कार्य के माध्यम से आप सुख शान्ति और अहिंसा का संदेश देते हुए दिखायी देते हैं।
- ब्राह्मणों का राष्ट्रद्रोह और क्षत्रिय ब्राह्मण संघर्ष
- महर्षि कश्यप और शिष्य परशुराम
- परशुराम द्वारा अपनी माँ की हत्या
- परशुराम द्वारा क्षत्रियों से बदला और क्षत्रिय-ब्राह्मण संघर्ष की दूसरी कहानी
- महर्षि कश्यप की मध्यस्थता और ब्राह्मण-क्षत्रिय संघर्ष का अन्तः
- युद्धविद्या के महागुरु महर्षि कश्यप
10माता मनु और पिता कश्यप : एक समाज शास्त्रीMother Manu and Father Kashyap: as sociologists
दसवें अध्याय में महर्षि कश्यप और माता मनु को एक समाज शास्त्री के रूप में याद किया गया है।
11महर्षि कश्यप की सन्तानों का विभिन्न जातियों तथा वर्गों में रूपान्तरणTransformation of Kashyap's descendants into various castes and classes
ग्यारहवें अध्याय में मानव विकास की प्रक्रिया के साथ ही जातियों की उत्पत्ति में किस प्रकार कश्यप की सन्ताने ही धीरे-धीरे विभिन्न जातियों के रूप में बदल गयीं, को दर्शाया गया है।
- मानव विकास की प्रक्रिया और महर्षि कश्यप- प्रथम स्तर आदिम जंगली अवस्था
- द्वितीय स्तर- खेती का जन्म और कूर्म कृषक जाति का उद्भव
- तृतीय स्तर- विशेषीकरण और कृषक जाति सैकड़ों जातियों के रूप में रूपान्तरण- बढ़ई, लोहार, अहीर, गडेरी, मल्लाह, (धीवर केवट बाथम), तेली, काछी शाक्य, लोधे, गूजर, जाट, कुम्भकार, वंणिक तथा अन्य जातियों का उद्भव
- जातियों का वर्ण व्यवस्था में रूपान्तरण (1) कूर्म विश और वैश्य वर्ण का उद्भव।
- (2) कूर्म और क्षत्रिय वर्ण का उद्भव।
- (3) कूर्म और ब्राह्मण वर्ण व्यवस्था का उद्भव।
- (4) शूद्र वर्ण का निर्माण और वर्ण व्यवस्था का विकृतीकरण
12विश्व विजेता लहरों के स्वामी, वैश्वीकरण के प्रस्तोता महर्षि कश्यप और माता मनुWorld-conqueror, master of the waves, proponent of globalisation: Maharshi Kashyap and Mother Manu
बारहवें अध्याय में महर्षि कश्यप को एक आदर्श शासक, विश्व विजेता, जल सेना के निर्माता तथा व्यापार के भूमण्डलीकरण के प्रथम प्रस्तोता (जन्मदाता) के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- भूमंडल के स्वामी राजर्षि कश्यप
- जल सेना के निर्माता
- लहरों के स्वामी सम्राट कश्यप
- व्यापार को वैश्विक स्वरूप प्रदान करने वाले राजर्षि कश्यप
- भूमण्डलीकरण के प्रथम प्रस्तोता मनु और कश्यप
13विश्व निर्माण में प्रजापति महर्षि कश्यप की भूमिकाRole of Prajapati Maharshi Kashyap in building the world
तेरहवें अध्याय में विश्व निर्माण में महर्षि सम्राट कश्यप की भूमिका का विश्लेषण करते हुए उनके पृथ्वी त्राता, पालनकर्ता, आदर्श शासक, स्वर्ग के सुरो आर्यों के शरणदाता, कृषि तथा शिल्प विद्या (इंजीनियरिंग) के विस्तार एवं विश्व के एकीकरण की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्हें बसुधैव कुटुम्बकम की साकार प्रतिमूर्ति बताया गया है।
- पृथ्वी त्राता महर्षि कश्यप
- पालनकर्ता प्रजापति महर्षि कश्यप
- आदर्श समाज व्यवस्थापक महर्षि कश्यप
- आर्यो अर्थात स्वर्ग के सुरों के शरणदाता सम्राट कश्यप
- जीवन दायिनी कृषि तथा शिल्प विद्या के विस्तारक कूर्म कश्यप
- विश्व के एकीकरण के नायक महर्षि कश्यप
- वसुधैव कुटुकम्बकम की साकार प्रतिमूर्ति महर्षि कश्यप
14महर्षि कश्यप उर्फ सृष्टिकर्ता ब्रह्मा को अपमानित करने का षड्यंत्रThe alleged conspiracy to disparage Maharshi Kashyap alias Brahma the creator
अंतिम चादहवें अध्याय में महर्षि कश्यप उर्फ सृष्टिकर्ता ब्रह्मा को अपमानित करने के विरोधियों के षडयंत्रों का पर्दाफाश किया गया है।
- कूर्म को कछुआ बनाना
- कश्यप को भी कछुआ कच्छप बनाना
- कश्यप के पाँच लाख से अधिक वेदमंत्रों को नष्ट करना
- कश्यप को ब्रह्मा का पौत्र बताना
- ब्रह्मा (नाना) को विष्णु (नाती) की नाभि से पैदा दिखाना
- कूर्म कश्यप ब्रह्मा के समानान्तर नकली ब्रह्मा खड़ा करना
- सृष्टिकर्ता ब्रह्मा को अपनी पुत्री के साथ समागम द्वारा सन्तानोत्पत्ति दिखाना
- पुत्री समान सरस्वती के प्रति ब्रह्मा को कामान्ध दिखाना
- ब्रह्म पुत्र और ब्रह्मपुत्री सरस्वती का उदाहरण
- ब्रह्मा तथा इन्द्र पूजा पर रोक
- कश्यप पत्नी माता मनु के इतिहास को मिटाने की कोशिश
- कूर्म कश्यप के कृषि कर्म को पाप कर्म, अधर्म कहना
- देवता ईश्वर के पर्याय असुरों (कश्यप की जाति) को दुष्टता का पर्याय बताना
- संस्कृत के लेखक ही महर्षि कश्यप के विरुद्ध क्यों?
“
आदि पूर्वज महर्षि कश्यप
देखा जाय तो आज संसार के विभिन्न राष्ट्रों में रहने वाले मानव (हिन्दू, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध, जैन, शैव, शाक्त, वैष्णव, सनातनी, आर्य समाजी तथा ब्राह्मण धर्मी सभी) महर्षि कश्यप के ही वंशज हैं। अतः महर्षि कश्यप सभी के आदि पूर्वज होने से सभी के लिए पूज्य हैं। इनके जन्मदिन को संसार के सभी मानवों को उत्साह के साथ मनाना चाहिए।
पुस्तक का उद्देश्य संसार के आदि पूर्वज महर्षि कश्यप के सच्चे स्वरूप को संसार के सामने लाना, उनके विरुद्ध फैलाये गये झूठ का पर्दाफाश करना तथा विश्व का एकीकरण रहा है। पुस्तक विस्तार न पा जाय, अतः उसके संक्षिप्त स्वरूप को ध्यान में रखा गया है। पुस्तक अपने उद्देश्य में कितना सफल होगी, इसे तो पाठक ही बता सकेंगे।
यह नया चिन्तन हमने इस पुस्तक में दिया है। पाठक इसे अन्यथा न लेकर तथ्यों की परिधि में सत्य का परीक्षण कर स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं। मेरा उद्देश्य तो किसी के यश को कम करना न होकर सत्य को सामने लाना है।
महर्षि कश्यप
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