आरक्षण कृपा है — या लोकतंत्र की धुरी?
Is reservation a favour — or the very axis of democracy?
आरक्षण की धुरी पर
On the Axis of Reservation
सामाजिक न्याय, संवैधानिक प्रतिनिधित्व और समानता पर आधारित काव्य संग्रह
काव्य संग्रहशोध ग्रन्थ
1990 में तत्कालीन प्रधान मंत्री श्री वी. पी. सिंह द्वारा मण्डल आरक्षण की घोषणा क्या हुई, सम्पूर्ण समाज में जैसे भूचाल आ गया। आरक्षण के पक्ष और विपक्ष को लेकर चारों और तोड फोड, आन्दोलन, आगजनी, बगावत तथा विद्रोह के स्वर सुनाई देने लगे।
प्रस्तुत काव्य संग्रह आरक्षण की धुरी पर हजारों वर्षों से चले आ रहे वर्ण आरक्षण के बीच मण्डल आरक्षण जनित भारतीय समाज की क्रिया प्रतिक्रिया, समर्थन विरोध की ध्वनि प्रति ध्वनि, और उनकी धड़कनो की काव्यमय प्रस्तुतीकरण है। इसमें वारक्षण तथा मण्डल आरक्षण के बीच आरक्षण के रचनात्मक तथा विध्वंसात्मक पहलूओं के साथ ही आरक्षित अनारिक्षत दोनो ही वर्गों की भावनाओं को काव्य का विषय बनाया गया है।
इस काव्य संग्रह की 90 प्रतिशत से अधिक रचनाएं 1990 के मण्डल आरक्षण लागू करने की घोषणा के माह की ही उपज हैं।
A collection of poems in the 'sahaj kavita' (simple poetry) mode, written mostly in the month Mandal reservation was announced in 1990. It gives poetic voice to the reactions, support and opposition in Indian society around the age-old varna 'reservation' and the Mandal reservation, covering both the reserved and the unreserved sections. Publication was blocked at the time and the book appeared about 18 years late.
90 प्रतिशत से अधिक रचनाएं 1990 में मण्डल आरक्षण की घोषणा के माह में लिखी गयीं।
पाण्डुलिपि कम्पोज हो चुकी थी, पर विरोध के दबाव में उस समय पुस्तक छप न सकी।
पुस्तक लगभग 18 वर्ष विलम्ब से छपी; कवि ने इसके लिए क्षमा-प्रार्थना की है।
संग्रह सहज कविता की विधा में है और डॉ. रवीन्द्र भ्रमर की स्मृति को समर्पित है।
लेखक के अनुसार 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के बावजूद सरकारी नौकरियों में सात प्रतिशत ही मिल पायीं।
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जातीय बनाम आर्थिक आधार
आरक्षण विरोधियों का एक तर्क यह भी है कि जातीय आधार पर दिया जाने वाला यह आरक्षण जातिवाद को जन्म देता है। अतः आरक्षण के जातीय आधार को समाप्त कर उसे आर्थिक आधार के साथ देना चाहिए। देखने को यह तर्क तो अच्छा लगता है परन्तु वे यह भूल जाते हैं कि S.C., S.T., O.B.C. में गरीबो की संख्या सर्वाधिक है जो हजारों वर्षों तक सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक रूप से शोषण, अन्याय, अत्याचार, की शिकार रही हैं।
एक कवि ह्दय तथा जागरुक समाज शास्त्री के रूप में हमने भी मण्डल आरक्षण जनित तत्कालीन भारतीय समाज की क्रिया प्रतिक्रिया को निकट से देखा और उनकी घड़कनों को सुना। इतना ही नहीं आज भी आरक्षण के विरोध और समर्थन में बन्द, आन्दोलन, आग जनी तोड़ फोड़ की घटनाएं होती रहती हैं। यह समर्थन और विरोध कब तक चलेगा कहा नहीं जा सकता।
पुस्तक की भूमिका अलीगढ़ विश्वविघालय अलीगढ़ के हिन्दी प्रोफेसर डॉ. रवीन्द्र भ्रमर ने हमारे आग्रह पर लिखा था। आप एक लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकार रहे हैं और सातवें दशक की सहज कविता के जनक माने जाते हैं। आपने मेरी इन कविताओं के संग्रह को "सहज कविता की अनूठी कृति की संज्ञा से विभूषित किया है।
आरक्षण की धुरी पर
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