क्या पहले ‘मनु’ वास्तव में पिता थे — या मानव जाति की आदि माता?
Was the first Manu really a father — or the mother of humankind?
आदि माता मनु : एक नयी खोज
The First Mother Manu: A New Discovery
वैश्वीकरण की प्रथम नायिका: मानव जाति की जननी माता मनु और प्राचीन त्रिलोक का भूगोल
मौलिक शोध15 अध्याय
पुस्तक चौदह मनुओं (उपाधि धारक) की श्रृंखला में प्रथम मनु / आदि माता मनु का प्रामाणिक इतिहास प्रस्तुत करती है । इसके अनुसार प्रथम मनु पिता नहीं मानव जाति की मां थी । माता मनु के नाम पर ही उनकी संतानें मनुष्य कही गयीं ।
आदिम काल में, जबकि विवाह संस्था का जन्म नहीं हुआ था, संतान की पहचान मां से ही होती थी । जैसे पशुओं में आज भी गाय के बच्चे, बकरी के बच्चे कहे जाते हैं । सांड का बच्चा कोई नहीं कहता । अधिक पत्नियों की स्थिति में भी मां के आधार पर ही बच्चों की पहचान बनती है । जैसे प्राचीन जातियां माता दिति के बच्चे दैत्य, अदिति के बच्चे अदैत्य / आदित्य, दनु के बच्चे दानव और माता मनु के बच्चे मनुष्य / मानव कहे गये । जबकि सब के पिता कूर्म कश्यप थे । इसलिए सारी सृष्टि (मानव सृष्टि) काश्यपी कही गयी ।
प्रथम मनु माता मनु है प्रथम विधि वेत्ता, प्रथम समाजशास्त्री तथा वैश्वीकरण की प्रथम प्रस्तोता थीं । हम सब मनुष्य इन्हीं के नाम पर कहे गए तथा मन्वंतर सिद्धांत भी इन्हीं के नाम पर शुरू हुआ ।
पुस्तक में प्राचीन विश्व के स्वर्ग लोक, नरक लोक तथा सात पातालों की भौगोलिक स्थिति का सप्रमाण विश्लेषण किया गया है, जिसमें उत्तरी विश्व, विशेषकर यूरोपीय प्रदेशों को स्वर्ग लोक, मध्य विश्व के शराष्ट्रों को नरक लोक तथा दक्षिणी विश्व के राष्ट्रों को पाताल लोक कहा जाता था । तब भारत मनुष्य लोक था । माता मनु की संस्कृति के विस्तार ने तीनों लोकों के अस्तित्व को समाप्त कर उन्हें मनुष्य लोक का हिस्सा बना दिया, फिर तो वहां के निवासी भी मनुष्य कहे जाने लगे । विश्व की यह पहली प्रक्रिया थी, जिसे लेखक ने वैश्वीकरण, मानुषीकरण, कौर्मीकरण जैसे विविध नामों से प्रस्तुत किया है ।
The book argues that the first Manu (Svayambhuva Manu, also called Shatarupa) was a woman, the mother of humankind and wife of Kurma Kashyapa, and that human beings (manushya) are named after her rather than after a male Manu. It draws on the Vedas, the Ramayana, the Puranas, the Bible and the Quran to re-read the flood story, the Manvantara doctrine and the Manusmriti's attribution, and maps the ancient 'three worlds' (heaven, naraka, patala) onto the geography of northern, middle and southern regions, describing the spread of Manu's farming culture as the first globalisation.
वाल्मीकि रामायण (अरण्यकाण्ड 74/29) में लिखा है: कश्यप पत्नी मनु की संतानें ही मनुष्य कही गयीं।
पुस्तक के अनुसार शतरूपा माता मनु का ही आध्यात्मिक नाम है, जो कूर्म कश्यप (ब्रह्मा) की पत्नी थीं।
ऋग्वेद के ‘मनुष्पिता’ का अर्थ पुस्तक में ‘मनु के पिता (दक्ष)’ या ‘मनुष्यों के पिता कश्यप’ बताया गया है।
पुस्तक उत्तरी विश्व को स्वर्ग लोक, मध्य विश्व को नरक लोक और दक्षिणी विश्व को पाताल लोक मानती है।
पुस्तक के अनुसार ‘नरक’ का अर्थ है नर (मनुष्य) + ओक (घर), अर्थात् मनुष्यों का घर।
मनु पर यह शोध पत्र पहली बार उ.प्र. समाजशास्त्र परिषद के आगरा अधिवेशन (23-25 जनवरी 1994) में प्रस्तुत हुआ।
15 अध्याय, एक यात्रा
01प्रथम मनु पिता नहीं, माँ थीThe First Manu Was Not a Father but a Mother
प्रथम अध्याय में वेदों आदि के प्रमाणों सहित सिद्ध किया गया है कि प्रथम मनु मानव जाति की माँ थी, जिसके नाम पर उसकी सन्तानें मनुष्य कही गयीं और उनका देश मनुष्य लोक कहा गया।
- चौदह मनुओं में प्रथम मनु कौन?
- स्वायंभुव मनु मनुष्यों की माता थी
- माताओं के नाम पर सन्तति नामकरण की आदिम परंपरा
- शतरूपा माता मनु तथा ब्रह्मा पिता कश्यप का आध्यात्मिक नाम
- मातृ सत्तात्मक परिवारों के प्रमाण
- तीन सृष्टिकर्ता कश्यप, ब्रह्मा और मनु का रहस्य
- मनु के माता होने के ऋग्वैदिक प्रमाण
- माता मनु और पिता कश्यप (ब्रह्मा) प्रथम स्त्री पुरुष नहीं
02वैवस्वत मनु विदेशी और यमराज का भाई था?Was Vaivasvata Manu a Foreigner and Yama's Brother?
दूसरे अध्याय में सिद्ध किया गया है कि यमराज (अरब का शासक) के भाई वैवस्वत को मनु की उपाधि देकर उसे वैवस्वत मनु कहा गया। यह विदेशी था। आर्य ब्राह्मणों ने इसे ही मानव जाति का पिता बनाकर प्रस्तुत किया।
- वैवस्वत मनु विदेशी था
03जल प्रलय की नायिका माता मनु और उनका परिवारMother Manu and Her Family: Heroine of the Great Flood
तीसरे अध्याय में कुरान, बाईबिल, शपथप ब्राह्मण, जैसे ग्रंथों के तथ्यों के आधार पर सिद्ध किया गया है कि जल प्रलय से बचाने का कार्य माता मनु उनके पति कश्यप तथा उनकी सन्तानों ने ही किया था।
- शतपथ ब्राह्मण की जल प्रलय कथा और
- कुरान और बाइबिल में वर्णित पानी का तूफान और नूह
- जेन्द अवेस्ता का हिम-प्रलय और यम
- जल प्रलय की वास्तविक नायिका मनु माँ
04मनुस्मृति मनु की कृति नहीं?Is the Manusmriti Not Manu's Work?
चौथे अध्याय में सिद्ध किया गया है कि वर्तमान मनुस्मृति मनु की कृति नहीं है।
- मनुस्मृति कब लिखी गयी?
- मनुस्मृति मनु की कृति नहीं
- मनुस्मृति के लेखक का नाम न होने का रहस्य
- मनुस्मृति भृगु ब्राह्मण ने लिखी
05माता मनु और मन्वन्तर सिद्धांतMother Manu and the Manvantara Doctrine
पाँचवाँ अध्याय प्रथम मनु (माता मनु) के नाम पर चलायें गये मन्वन्तर सिद्धांत से जुड़ा है।
06प्रथम समाजशास्त्री माता मनु?Mother Manu as the First Sociologist?
छठवें अध्याय में माता मनु के प्रथम समाज शास्त्री (क्रियात्मक समाज शास्त्री) होने को लेकर प्रश्न उठाये गये हैं।
07विश्व की प्रथम प्रक्रिया : मानुषीकरण/कृषकीकरण/वैश्वीकरणThe World's First Process: Manushikaran / Farmerisation / Globalisation
सातवाँ अध्याय माता मनु द्वारा चलाई गई विश्व की प्रथम प्रक्रिया मानुषीकरण, कौर्मीकरण, कृषकीकरण, अथवा वैश्वीकरण/भूमण्डलीकरण की व्याख्या करता है।
08आदिम सृष्टि का केंद्र माता मनु का भारतMother Manu's India: Centre of Primal Creation
आठवें अध्याय में सिद्ध किया गया है कि प्राचीन भारत ही प्रथमतः मनुष्य लोक था। यही आदिम सृष्टि का केंद्र था।
- आदिम सृष्टि का केंद्र मनुष्यलोक या भारत
- मनु और मानव सभ्यता की जन्म स्थली सप्त सिंधु देश/मनुष्य लोक/भारत
09स्वर्ग लोक अथवा भूमंडल के उत्तरी राष्ट्रThe Heaven-World: Northern Nations of the Globe
नौवें अध्याय में सिद्ध किया गया है कि आर्यों ब्राह्मणों की मातृभूमि यूरोपीय 21 प्रदेश ही ब्राह्मणों द्वारा स्वर्ग लोक के रूप में प्रस्तुत किये गये। बाद में स्वर्ग की कल्पना अन्य धर्मों में भी पहुँच गयी।
10स्वर्ग लोकों का मानुषीकरण/वैश्वीकरणManushikaran / Globalisation of the Heaven-Worlds
10वें अध्याय में सिद्ध किया गया है कि किस प्रकार माता मनु की क्रैषिक संस्कृति ने स्वर्ग लोकों (शरावियों के देशों) में पहुँच कर उन्हें मनुष्य लोक अर्थात् भारत की संस्कृति में रंगकर उनका अलग अस्तित्व समाप्त कर उन्हें भूमण्डल का अंग बना दिया।
- आर्यों के गुरु बृहस्पति द्वारा स्वर्ग लोकों का वैश्वीकरण
- स्वर्ग लोकों (देशों) के वैश्वीकरण के कुछ उदाहरण
11दक्षिणी विश्व के राष्ट्र अथवा पाताल लोक पाताल की अवधारणा और उनकी भौगोलिक स्थितिSouthern Nations of the World, or Patala: The Concept and Its Geography
ग्यारहवें अध्याय में सिद्ध किया गया है कि विश्व के दक्षिणी राष्ट्र-दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, आस्ट्रेलिया, सुमात्रा, जावा मलेशिया जैसे राष्ट्र ही पृथ्वी के तल (पेंदी) में होने से पाताल कहे गये।
12मनुष्य लोक ही नरक लोकThe Human World Itself Is the "Naraka" World
बारहवें अध्याय में सिद्ध किया गया है कि शरणागत आर्य ब्राह्मणों ने प्रस्थापित होने के बाद भारत सहित विश्व के मध्य के राष्ट्रों को नरक कहा।
- मनुष्य लोक ही नरक लोक
13पाताल तथा नरक लोकों का मानुषीकरण/वैश्वीकरणManushikaran / Globalisation of the Patala and Naraka Worlds
तेरहवें अध्याय में दिखाया गया है कि किस प्रकार माता मनु द्वारा अमेरिका, अफ्रीका, आस्ट्रेलिया जैसी पाताल लोकों को मनु की संस्कृति में रंगकर उन्हें मनुष्य लोक का अंग बना दिया गया।
- (क) अमेरिका का मानुषीकरण/वैश्वीकरण
- (ख) अफ्रीका का मानुषीकरण/वैश्वीकरण
- (ग) आस्ट्रेलिया का मानुषीकरण/वैश्वीकरण
14विश्व सभ्यता एवं संस्कृति की जननी माता मनु और उनके वंशज कुरमी/कृषकMother Manu, Source of World Civilisation, and Her Descendants the Kurmi Cultivators
चौदहवें अध्याय में सिद्ध किया गया है कि प्रथम सभ्यता के पुरोधा माता मनु के वंशज थे, जिन्हें, कुरमी/कृषक मनुष्य कहा जाता रहा है। ऋग्वेद ऐसे ही मनु वंशज कुरमी कृषकों का गीत है, जिसमें आर्यों/ब्राह्मणों ने मिलावट कर उन्हें अपने हित का साधन बनाने की कोशिश की।
- ऋग्वेद कुर्मी/कृषकों विशों का प्रथम काव्य ग्रंथ
- स्वर्गवादी संस्कृति हिंदू संस्कृति नहीं
- प्रथम वैश्वीकरण/मानुषीकरण के पुरोधा कुर्मी कृषक विश
- भाषा विज्ञान के प्रमाण
- भारत के मूल निवासी विश/कुर्मी कृषक
15निष्कर्ष तथा प्रस्थापनाएँConclusions and Propositions
पन्द्रहवें अध्याय में शोध के निष्कर्ष तथा प्रस्थापनाएँ दी गयीं हैं।
“
ऋग्वेद का ‘मनुष्पिता’: मनु पिता या माता?
ऋग्वेद में प्रयुक्त ‘मनुष्पिता मनुरायेजे पिता तथा मनुर व्रनीता पितानस्ता’ जैसे शब्दों का अर्थ ‘मनु हैं पिता जिनके’ आधार पर मनु को पिता बना दिया गया जबकि ‘मनुष्पिता’ का अर्थ मनु के पिता (दक्ष) अथवा मनुष्यों के पिता कूर्म कश्य / ब्रह्मा अधिक सार्थक है । कारण मनु दक्ष की पुत्री थी और कश्यप मनु के पति तथा दक्ष के दामाद थे ।
अपनी इन प्रस्थापनाओं को सिद्ध करने के लिए डॉ. निर्मोही द्वारा जो तथ्य, तर्क तथा प्रमाण यहाँ प्रस्तुत किये गये हैं, वे निश्चय ही भारत ही तो नहीं संपूर्ण विश्व की मनीषा को झकझोरने वाले हैं। मेरी दृष्टि से यह विद्वानों के लिए एक चुनौती है कि वे इसका खण्डन करें अथवा मण्डन।
यह कृति जहाँ मनु और मानव समाज से संबंधित नयी प्रस्थापनाएँ प्रस्तुत करने में सक्षम है, वहीं पर यह शोध के लिए नयी संभावनाओं की खिड़की भी खोलती है। वास्तव में यह अपने ढंग का अनूठा प्रयास है। इसके लिए डॉ. निर्मोही साधुवाद के पात्र हैं।
Shyam Nirmohi has proved that the first Manu was not the father but She was the Mother of Mankind, that is why we are called Manushya. Since that time the tradition of Manus has started. The book reveals historical Incident of Water (Jal Praley), Globel farming civilization derived from India, it's extension and impact over the worldwide human feeling and perception.
उसमें दोनों ही पक्ष विद्यमान हो सकते हैं और दोनों ही ठीक या गलत अथवा उपयोगी, अनुपयोगी हो सकते हैं तथा देश काल परिस्थिति के अनुरूप वे पक्ष बदल भी सकते हैं। मेरा यह दावा नहीं है कि मेरे निष्कर्ष पूर्णतः सत्य हैं, वरन उनमें बहुत कुछ नया जुड़ने की संभावनाएं भी निहित हैं। आवश्यकता है प्राचीन तथ्यों को विज्ञान की आँखों से देखने की।
आदि माता मनु : एक नयी खोज
अपनी प्रति मँगवाएँ — नीचे दिए लिंक से या सीधे संपर्क करके।
“Manu was a mother of human kind”… Firstly I’m surprised to know this.
You have Very rationally and beautifully proved this fact. And the facts about the heaven and hell presented here are really making my mind to think about it. I can belive on this scientific research (as stated in site) only after reading it. Could you please provide a link to buy this?
Thank you Vinay for showing your interest in this book.
Please have look at this link to buy the same —
https://www.exoticindiaart.com/book/details/adi-mata-manu-new-discovery-MZE433/