12 वर्ष के शोध ने हिन्दू संस्कृति के बारे में कौन-से बारह सच उजागर किए?
What twelve truths did twelve years of research reveal about Hindu culture?
हिन्दू संस्कृति के बारह सच
Twelve Truths of Hindu Culture
12 वर्ष की अध्ययन-साधना से निकले हिन्दू संस्कृति के बारह सत्य
मौलिक शोध12 अध्याय
कृषक भारत में कृषकों से जुड़ी अपनी पी-एच.डी. की उपाधि के लिए जब मैं प्राचीन सांस्कृतिक साहित्य का अध्ययन कर रहा था तो वैज्ञानिक विश्लेषण के बीच हिन्दू संस्कृति से जुड़े अनेक सत्यासत्यों का पता चला। 12 वर्ष की अनवरत अध्ययन साधना के बीच मुझे पता चला कि हिन्दू संस्कृति में आज वैदिक संस्कृति के नाम पर वैदिक संस्कृति के विरुद्ध अनेक सत्य-असत्य के रूप में तथा अनेक असत्य/अधर्म सत्य तथा धर्म के रूप में प्रस्थापित हैं। पुस्तक में इन्हीं तथ्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण देखने को मिलेगा।
पुस्तक 'हिन्दू संस्कृति के बारह सच' बारह अध्यायों में विभक्त है। इनमें से अधिकांश सच राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय समाजवैज्ञानिक सम्मेलनों/सेमीनारों में पढ़े गये शोध पत्रों के रूप हैं। समाजशास्त्रियों के बीच चर्चित शोधपत्रों को ही यहां स्थान दिया गया है।
कुछ भी हो यह ग्रन्थ हिन्दू समाज को छद्म धार्मिक लेखकों द्वारा धर्म के नाम पर फैलाए गये अधार्मिक मायाजाल से बाहर निकालकर वैज्ञानिक हिन्दुत्व के संसार में प्रवेश करने का मार्ग प्रशस्त करेगा, ऐसा मेरा विश्वास है।
Drawing on twelve years of study of ancient cultural literature during his Ph.D. on cultivators, the author presents twelve chapters, mostly revised research papers read at national and international sociology conferences, that re-examine received claims about Hindu culture, such as the four yugas, Vritra and Indra, the Ganga, rebirth, moksha, the samudra manthan myth, kabaddi and the idea of dharma. He argues for a scientific reading of Hindutva and of the Constitution as the scripture of today's Indians.
चार युग पतन का नहीं, जंगली अवस्था से कलियुग की ओर प्रगति का रेखीय उद्विकास सिद्धान्त हैं।
वृत्रासुर विशाल मानसरोवर ब्रह्म सर का प्रतीकात्मक रूप है; इन्द्र ने उसे तोड़कर सरस्वती आदि सात नदियां निकाली।
गंगा भगीरथ से बहुत पहले हरिश्चन्द्र के समय भी मनुष्य लोक में बहती थी।
पुस्तक के अनुसार शरीर अमर है और पुत्र-पुत्री, पोता-पोती के रूप में उसका पुनर्जन्म होता है।
पुस्तक के अनुसार मोक्ष, सन्यास और स्वर्ग विदेशी आर्य दर्शन के अंग हैं, हिन्दू दर्शन के नहीं।
पुस्तक के अनुसार आज सभी भारतीयों का धर्मग्रन्थ भारतीय संविधान है।
12 अध्याय, एक यात्रा
01वैदिक वाङ्गमय का चतुर्युगीय उद्विकास सिद्धान्त अथवा चौपाया से मानव बनने का विज्ञानThe four-yuga evolutionary theory of Vedic literature, or the science of becoming human from a quadruped
मानव सत्ययुग की जंगली अवस्था के चौपाया मानव से त्रेता, द्वापर होते हुए कलियुग में सर्वश्रेष्ठ अवस्था की ओर बढ़ा; यह पतन का नहीं, रेखीय उद्विकास का सिद्धान्त है।
02वृत्रासुर अथवा मानसरोवर झीलVritrasura, or Lake Mansarovar
कूर्म कश्यप अर्थात् कूर्मावतार ब्रह्मा के तालाब (सर) मानसरोवर के वृत्रासुर बन जाने की कहानी का खुलासा; वृत्र के अहि रूप को मानसरोवर के तटवन्ध (मेड़) के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
03क्षत्रियों द्वारा ब्राह्मणों का समूल विनाश एवं 21 बार क्षत्रिय संहार का सचThe truth of the destruction of Brahmins by Kshatriyas and the 21-times massacre of Kshatriyas
इक्कीस वार क्षत्रिय संहार की कहानी का नया सच, जिसमें क्षत्रियों ने समाज द्रोही स्वार्थी ब्राह्मणों का समूल विनाश किया था।
04जब ब्राह्मणों ने बौद्धों हिन्दुओं का विनाश कियाWhen Brahmins destroyed the Buddhist Hindus
भारत में बौद्धों के विनाश का सच ब्राह्मण शासकों द्वारा बौद्धों के सामूहिक नर संहार के रूप में सामने आता है।
05गंगा का धर्मशास्त्र और गंगा प्रदूषणThe religious lore of the Ganga and Ganga pollution
गंगा के धर्मशास्त्र को ही गंगा प्रदूषण का मूल कारण मानकर गंगा के नये धर्मशास्त्र की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।
06मानव शरीर की अमरता और पुनर्जन्म का नया सिद्धान्तImmortality of the human body and a new theory of rebirth
हिन्दुत्व के कर्म एवं पुनर्जन्म सिद्धान्त पर नया सिद्धान्त, जिसमें आत्मा के स्थान पर मानवशरीर को अमर तथा पुनर्जन्म लेने वाले सत्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
07सन्यास, मोक्ष तथा स्वर्ग हिन्दुत्व के अंग नहींSanyasa, moksha and heaven are not parts of Hindutva
सन्यास, मोक्ष और स्वर्ग की नयी व्याख्या; वैज्ञानिक शोध में ये तीनों (वर्तमान अर्थ में) हिन्दू दर्शन के अंग न होकर विदेशी आर्य दर्शन के अंग के रूप में प्रगट हुए हैं।
08समुद्र मंथनः मिथक अथवा सर्वश्रेष्ठ के चयन की प्रतियोगिताSamudra manthan: myth, or a contest to select the best
समुद्र मंथन मिथक के मूलार्थ को सामने लाने का कार्य करता है।
09कबड्डी का समाजशास्त्र और हिन्दू संस्कृतिThe sociology of kabaddi and Hindu culture
कबड्डी की समाजवैज्ञानिक व्याख्या करते हुए हिन्दू संस्कृति पर विचार।
10हिन्दुत्व में धार्मिकता जनित सामाजिक प्रदूषणSocial pollution generated by religiosity in Hindutva
हिन्दू संस्कृति में धर्म के नाम पर फैलाये गये सामाजिक प्रदूषण का चित्र; 'महाभारत कालीन धार्मिक अधार्मिकता' में सत्य, धर्म, न्याय के रूप में प्रस्तुत अन्याय, अधर्म, असत्य के असली स्वरूप को रेखांकित किया गया है।
- महाभारत कालीन अधार्मिक धार्मिकता
11धर्म की वैज्ञानिक अवधारणा और धर्म ग्रन्थः भारतीयों का असली धर्मग्रन्थ भारतीय संविधानThe scientific concept of dharma and scripture: the Indian Constitution as Indians' real scripture
धर्म की वैज्ञानिक व्याख्या, जिसमें 'संविधान' को किसी भी देश के देशवासियों का असली धर्मग्रन्थ कहा गया है।
12भारतीय सांस्कृतिक विरासत की कबाड़ और सच की तलाशThe junk of India's cultural heritage and the search for truth
सांस्कृतिक विरासत का मंथन कर सच को खोजने का प्रयास किया गया है।
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शरीर की अमरता और पुनर्जन्म
छठवां अध्याय हिन्दुत्व के कर्म एवं पुनर्जन्म सिद्धान्त के सत्य पर से पर्दा उठाते हुए नया पुनर्जन्म का सिद्धान्त लेकर आया है जिसमें आत्मा के स्थान पर मानवशरीर को अमर तथा शरीर को पुनर्जन्म लेने वाले सत्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह पाठकों तथा विद्वानों के ऊपर निर्भर करता है कि वे वैज्ञानिक आधार पर किस सत्य को स्वीकार करते हैं।
'हिन्दू संस्कृति के बारह सच' आप की शोधपूर्ण नवीन कृति है। यह बारह अध्यायों में विभक्त है, जो शोध पत्रों के रूप में विभिन्न संगोष्ठियों में प्रस्तुत तथा कुछ शोध पत्रिकाओं में पूर्व से ही प्रकाशित हो चुके हैं। आप की यह कृति भी निश्चय ही प्रशंसनीय तथा स्वीकार करने योग्य है।
कुछ भी हो यह ग्रन्थ हिन्दू समाज को छद्म धार्मिक लेखकों द्वारा धर्म के नाम पर फैलाए गये अधार्मिक मायाजाल से बाहर निकालकर वैज्ञानिक हिन्दुत्व के संसार में प्रवेश करने का मार्ग प्रशस्त करेगा, ऐसा मेरा विश्वास है।
हिन्दू संस्कृति के बारह सच
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