In Memoriam | स्मृति शेष

डॉ श्याम लाल निर्मोही
🪔 स्मृति शेष · In Memoriam

डॉ श्याम लाल निर्मोही

10 जनवरी 1947 – 5 दिसम्बर 2021

समाजशास्त्री, चिन्तक, लेखक और कवि — जिन्होंने इतिहास से वे प्रश्न पूछे जो पहले किसी ने नहीं पूछे थे। विनम्र श्रद्धांजलि। A sociologist, thinker, author and poet who asked the questions history never asked. Our humble tribute.

बचपन से जवानी तक हम समाज से लेते हैं,
झोली भरते जाते हैं, बदले में क्या देते हैं?
कुछ बन जाने के बाद यही फ़र्ज़ हमारा होता है —
जिस समाज ने हमें गढ़ा, उसे लौटाना होता है।

Through childhood and youth we only take from society;
once we have become someone, our duty is to give back.
— डॉ श्याम लाल निर्मोही · उनके प्रिय विचार, काव्य-रूप मेंउनके मूल शब्द: “बचपन से जवानी तक हम समाज से सिर्फ़ लेते हैं। कुछ बन जाने के बाद यह हमारा फ़र्ज़ है कि हम भी समाज को दें।”
“From childhood to youth, we only take from society. Once we have become something, it is our duty to give back.”

“मैं किताबों में हूँ”

अपने अन्तिम दिनों में वे इसी नाम की एक पुस्तक पर काम कर रहे थे। आज यह वाक्य सच है — उनके विचार, प्रश्न और खोजें उनकी पुस्तकों के पन्नों में जीवित हैं।

He was working on a book titled “Main Kitaabon Mein Hoon” — “I live in my books.” Today, that is exactly where he lives.

📚 उनकी पुस्तकें पढ़ें · Read His Books →

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जीवन-यात्रा · A Life in Milestones

  • 1947

    10 जनवरी — जन्म, ग्राम जसवां, अहरौरा, चुनारगढ़, मीरजापुर (उ.प्र.)

    Born in village Jaswan, Mirzapur (U.P.)

  • शिक्षा

    एम. ए. समाज विज्ञान — बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय; पी-एच.डी. — लखनऊ विश्वविद्यालय

    M.A. Sociology, BHU · Ph.D., University of Lucknow

  • 1978

    ‘मुक्ति यज्ञ’ (आपातकाल का इतिहास) — पहला प्रकाशित ग्रन्थ

    ‘Mukti Yagya’ — history of the Emergency

  • 1999

    ‘आदि माता मनु और मानुषीकरण’ — प्राचीन विश्व का वैज्ञानिक अध्ययन

    ‘Adi Mata Manu’ — a scientific study of the ancient world

  • 2006

    पटेल रत्न सम्मान — शोध एवं समाज-कल्याण के लिए

    Patel Ratn — for research and welfare of society

  • 2007–2010

    ऋग्वैदिक असुर और आर्य · लक्ष्मी-गणेश का आर्थिक समाजशास्त्र · उत्सवों का समाजशास्त्र · भारत की जातियां

    Rigvedic Asur and Aryans · Laxmi-Ganesh · Festivals · Indian Castes

  • 2021

    5 दिसम्बर — महाप्रयाण। उनके विचार उनकी पुस्तकों में जीवित हैं।

    5 December — he left us; his ideas live on in his books

जो पीछे छोड़ गए · His Legacy

20+पुस्तकें · Books
300+सम्मेलन · Conferences
100+सम्मान व पुरस्कार · Honours
1000+समाचार-पत्र व पत्रिकाओं में उल्लेख · Press mentions

अपनी श्रद्धांजलि भेजिए · Share a Tribute

यदि आप उनसे मिले, उन्हें सुना या उनकी पुस्तकें पढ़ीं हैं — अपनी स्मृति या संदेश हमें भेजिए। चुने हुए संदेश इस पृष्ठ पर साझा किए जा सकते हैं। If you met him, heard him speak or read his books, share a memory with us.

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