काला रंग अशुभ है — या ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली रंग?
Is black inauspicious — or the most powerful colour of the cosmos?
कालिया का लोहा
Victory of Black
काले रंग का वैज्ञानिक, भौतिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व और वैश्विक वर्चस्व
मौलिक शोध10 अध्याय
"कालिया का लोहा, दुनिया मानने लगी है" पुस्तक संसार की नस्ल भेद समस्या के निदान की दृष्टि से लिखी गयी हैं।
मुझे लगा कि यदि काले लोग अपने पर गर्व करने लगें तो गोरे अपने आप ठीक हो जायेंगे। यह पुस्तक इसी उद्देश्य की पूर्ति की दृष्टि से लिखी गयी है। इसमें कालों के लिए गर्व करने के अनेक आधार, तथा सूत्र खोजे गये हैं। इसमें काला के विज्ञान के साथ ही काला का धर्मशास्त्र, अध्यात्म, शास्त्र, काला का अर्थशास्त्र के साथ ही कालों के कामशास्त्री स्वरूप का भी वैज्ञानिक चित्रण किया गया है तथा कालों के समाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, धार्मिक, राजनीतिक योगदान को भी रेखांकित किया गया है।
यह पुस्तक न किसी (गोरों) से अपेक्षा रखती है कि वे काले गोरे का भेद न करें। सभी से प्यार करें। यह तो केवल कालों को स्वयं पर गर्व करने और गर्व से सीना तानकर चलने की शिक्षा देती है।
Written as a response to racial and colour discrimination, the book urges black people to take pride in their colour, work, knowledge and ability, on the author's view that this pride will in turn change the attitude of others. It examines 'the black' through science, spirituality, aesthetics, economics and religion, and traces the roots of prejudice against dark-skinned people. Its motto is 'Be proud of yourself, the world will become smaller'.
पुस्तक का सूत्र-वाक्य है: "अपने पर गर्व करो, दुनियाँ छोटी हो जायेगी"।
नौ अध्यायों में काला का विज्ञान, अध्यात्म, सौन्दर्य, अर्थ और धर्मशास्त्र परखे गये हैं।
लेखक के अनुसार पुस्तक 1 से 28 जनवरी 2019 के बीच पूर्ण हुई।
प्रेरणा: रेल-यात्रा की एक घटना और 2018 में सहारनपुर में "काला गुब्बारा" का लोकार्पण।
लेखक पुस्तक को रंगभेद की जड़ें खोजने और स्वाभिमान जगाने का प्रयास बताते हैं।
10 अध्याय, एक यात्रा
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गर्व ही समाधान
मुझे लगा कि यदि काले लोग अपने रंग, कर्म, ज्ञान, योग्यता इत्यादि पर गर्व करने लगे तो गोरा का अहंकार चकनाचूर हो जायेंगा। मैनें देखा है कि मानववाद और विज्ञान के अनुसार सभी मनुष्य है, परमात्मा, ईश्वर, खुदा, ने काले गोरे सभी को पैदा किया है। सभी एक ही पिता (ईश्वर) की सन्तान है जैसी शिक्षाओं का गोरों पर कोई असर नहीं होता है। इसलिए मुझे लगा कि गोरों से अपेक्षा न रखी जाये कि वे काले मनुष्यों से घृणा न करें।
आज विश्व के अधिकाँश देशों में लोकतंत्र है और सभी लोग एक सुर से मानव मानव के मध्य समता और समानता की वकालत करते हैं इसके बावजूद आज भी समाज में जाती नस्ल और रंग के आधार पर भेद भाव की भावना व्याप्त है जो कि मानवता के लिए कलंक है । ऐसे मैं डॉ. निर्मोही की प्रस्तुत पुस्तक प्रकाश पुंज बनकर समाज का मार्गदर्शन करने के लिए बहुत ही सटीक और प्रसांगिक कृति है।
आलोच्य पुस्तक प्रबुद्ध पाठकों को एक नयी दिशा में सोचने को विवश करेगी और सुधि पाठकों द्वारा इसका स्वागत किया जायेगा, ऐसा मेरा विश्वास है। पुस्तक का गेटउप मुख्या पृष्ठ एवं छपाई आकर्षक है। भाषा सरल एवं सर्वग्राही है तथा पठनीय एवं संग्रहनीय है।
इस घटना से मेरे भीतर स्वाभिमान का उदय हुआ। मानों रंग भेद/नस्ल भेद की समस्या का मुझे हल मिल गया। तभी से मैं कहने लगा-"अपने रंग/कर्म, योग्यता आदि पर गर्व करो दुनिया छोटी हो जायेगी।" समाज में जाति भेद, वर्ग भेद के साथ ही रंग भेद अर्थात काले-गोरों के बीच नस्ल भेद पाया जाता है।
कालिया का लोहा
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